अभयानंद अगर बाभनो को पढ़ा रहे हैं तो आप भी पढ़ाइए अपने लोगों किसने रोका है?

अभयानन्द सिर्फ़ ब्रह्मजनो को पढ़ाते है तो पढ़ाने दीजिए।आप लोग भी अपनों को पढ़ाइए, किसने रोका है?

लेकिन नहीं! इधर तो सबको (डाक्टर, इंजीनियर, प्रोफ़ेसर, वकील, पत्रकार, अधिकारी) राजनीति करने का चस्का लगा है। राजनीति भी कैसी? या तो भाषणबाज़ी या फिर अपने-अपने जाति के नेताओं की चापलूसी।

बाक़ी जिनको करना है, वो कर रहे हैं। महाराष्ट्र के नाँदेड में अम्बेडकरवादी मिशन, वर्धा में नालंदा एकेडमी, ग़ाज़ियाबाद में अम्बेडकरवादियों की कोचिंग कुछ उदाहरण हैं। शायद मेघवाल लोग भी राजस्थान में कोई कोचिंग चलाते हैं।

प्रत्येक व्यक्ति को यह स्वतंत्रता है कि किसी को बिना नुकसान पहुँचाये कोई भी कार्य कर सकता है अपनी जाति के लिए कुछ करना हो या कोई और कार्य, इससे किसी को आपत्ति नही होनी चाहिए। अगर अभयानंद अपनी जाति को पढ़ाकर आगे बढ़ाने चाहते है तो इसमें समस्या क्या है। आप भी अपनी जाति को पढ़ाकर आगे बढ़ा सकते है यह करने से आपको रोका किसने है?

Published by Cow

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