
जेएनयू में सेक्स होता है
जेएनयू में लोग दारू सिगरेट पीते है
जेएनयू में लोग कंडोम इस्तेमाल करते है
और क्या है आपकी दलीलें?और हाँ जेएनयू में देशद्रोह होता है।जेएनयू के लोग मठ्ठे मक्कार और कामचोर होते है।
पहली आपकी मासूम दलील का जवाब-आप सेक्स नहीं करते!आपके माता पिता ने आपको उंगली से पैदा किया है या फिर कोई दैव्य शक्ति से पैदा हुए है।लोग एक दूसरे को पसंद करते है तो सेक्स करते है,लोगो के सेक्स करने पर प्रश्न खड़े करने वाले आप कौन?अब बगैर शादी के सेक्स कर रहे है तो सुनिए आपकी यह बगैर प्रेम की शादी सामाजिक वेश्यावृत्ति ही है जिसमे आप एक अंजान औरत जिससे आपने कभी बात भी नहीं कि है उसे अपने घर उठा लाए है सेक्स करने के लिए।उनका सेक्स तो आपके सेक्स से लाख गुना अच्छा है जो एक दूसरे को पसंद करने के बाद सेक्स कर रहे है आप तो सामजिक वेश्यावृत्ति कर रहे है वह भी दहेज़ के साथ।लड़की के बाप को नंगा करने के बाद।आपने तो ऐसे मज़े ढूंढ रखे है जिसमे आप एक अंजान औरत को उल्टा माल धन लेकर उठा लाते है,बिल्कुल खुली लूट डकैती।शादी तो वह है जो दो लोग प्रेम के बाद एक दूसरे के साथ रहने का फैसला कर ले,और ऐसी शादी आपने प्रतिबंधित कर रखी है।प्रेम के बगैर सेक्स ऐसा है जैसे खाना,पॉटी,सोना और सांस लेना।
दारू सिगरेट पर तो आप ऐसा भोंचाल मचा रहे है जैसे आपकी हर गली के कौने पर जेएनयू के पढ़ने वाले स्टूडेंट्स ने दारू और भांग की दुकान आबाद कर रखी है।आप सबसे बड़े दारूकुट्टे है जिन्होंने हर गांव में दारू की दुकान आबाद कर रखी है।जहां जाओ वहां देसी शराब की दुकान का बोर्ड नज़र आता है।और देशभर में करोड़ो नशामुक्ति केंद्र चल रहे है,तुम्हारी पत्नियां तुम्हारे शराब पीने से परेशान है,वह तुम्हे चाय में घोल गोली देती है ताकी आप शराब नहीं पिये।
और कंडोम, यह बड़ी मज़ेदार बात है।आपको तो कंडोम की संख्या भी पता है,आप तो इस्तेमाल किये कंडोम गिनने जेएनयू बिल्डिंग यात्रा पर जाते है,उन लोगो ने आपके कंडोम गिनने के लिए इस्तेमाल करने के बाद चौक में लाकर रख दिये है,लीजिए गिन लीजिए।एक एक कंडोम गिन मारा है आपने।आप सरकार को पत्र लिखकर कंडोम की बिक्री प्रतिबंधित क्यों नहीं करवा देते है,यह जेएनयू के हज़ार पांच हजार स्टूडेंट्स ही तो देशभर की कंडोम ख़पत कर रहे है,कंडोम की सारी फैक्टरियां इन पांच हजार स्टूडेंट्स से ही आबाद है,यह आठ घंटे खाना आठ घंटे सोना और आठ घंटे सेक्स करते है,सेक्स कर कर के आधे हो गए।कंडोम के इस्तेमाल को ब्राउन शुगर के इस्तेमाल की तरह दंडात्मक बना दीजिए।
देशद्रोही का झंडा लेकर घूमते है।आपके विचार के आदमी का ही बस देस होता है,बाकी सारे देशद्रोही है जो आपके विचार का नहीं वह देशद्रोही है।आप सबसे बड़े देशद्रोही है।देश बनता है संविधान से,सुप्रीम कोर्ट ने माना है पार्लियामेंट से बड़ा संविधान है,मतलब संविधान से ऊंचा कुछ भी नहीं है,जिसने संविधान से प्रेम किया केवल वही देसभक्त है।आप संविधान के हर एक हिस्से की धज़्ज़िया उड़ाते है,सारा देश जानता है जेएनयू पर भोंकने वाले संविधान और गांधी के संबंध में क्या विचार रखते है।अगर लोग टटोले तो वह पाएंगे कि आप संविधान के पूरे आधारभूत ढांचे के विरुद्ध है मतलब आप पूरे देश के विरुद्ध है।आप धर्मनिरपेक्षता, वाक्य और दैहिक स्वतंत्रता, जातिगत समानता,लैंगिक समानता, लोकतंत्र, परिसंघात्मक शासन व्यवस्था यह सब खत्म करना चाहते है।आप एक विचार एक खानपान एक पहनावा एक भाषा एक संस्कृति और अंत में एक धर्म चाहते है।क्यों ठीक है न!
आपकी जेएनयू से नफरत का कारण कुछ खास नहीं है।वही घिसा पिटा कारण है।वहां पढ़ने वाले पांच सात हज़ार बच्चे कम्युनिस्ट विचारों के है जो आपको चुभते है।सारे देश के स्कूल कॉलेज आपके व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी वालो से भरे पड़े है और वह सब भी सेक्स करते है दारू भी पीते है कामचोर भी है और हाँ कंडोम का इस्तेमाल भी करते है।
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